खुद को जानने का सरल तरीका।

खुद को जानने का सरल तरीका।

पहले तो आप को समझना चाहिए अंदर क्या है? और बाहर क्या है अगर आप नहीं समझते कि अंदर और बाहर क्या है तो आप सभी गलत जगह पर जाएंगे अब अंदर क्या है आपका शरीर समय के साथ इकट्ठा हुआ हां या ना हेलो मां आप जो इकट्ठा करते हैं वह आपका हो सकता है आपने ही हो सकते क्या इतना स्पष्ट है वह जो भी हो जो आप इकट्ठा करते हैं वह आपका हो सकता है आप नहीं हो सकते तो यह शरीर एक संग्रह है जिसे आप मेरा मन कहते हैं मन की सारी चीजें बटोरी हुई है जो इस पर निर्भर है कि आप अपने जीवन में किन हालातों का सामना करते हैं तो आपका शरीर भोजन का ढेर है छोटा या बड़ा आपका मन प्रभावों का ढेर है फिर से छोटा या बड़ा इन दो ढेरो के बीच आप कहां हैं तो अंदर बाहर इन शब्दों को छोड़ दीजिए क्योंकि जब भाषा की बात आती है |

तो सिर्फ इतनी ही गुजारिश है उसके अंदर शायद अलग-अलग लोगों से अलग-अलग रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं हमनहीं जानते कि उन्होंने किस संदर्भ में इस्तेमाल किया आपने हर किसी को एक ही बंधन में रखा और कहा आप सभी ने कहा मैं नहीं जानता कि यह सब लोग कौन हैं अलग-अलग लोगों ने अपने आसपास अलग-अलग तरीके अपनाए अपने आसपास के लोगों को देखते हुए जो उनके आसपास के लोगों के लिए सबसे उपयुक्त उसके अनुसार उन्होंने काम किया होगा इसकी संभावना है अगर वह ईमानदार हैं तो उन्होंने अपने आसपास के लोगों के साथ काम किया होगा किसी और के सिद्धांतों के साथ नहीं किसी व्यक्ति को देखकर आप कुछ ऐसा करेंगे जो उस व्यक्ति के लिए सही है जो आप इस व्यक्ति के साथ करेंगे वह किसी और व्यक्ति के लिए कारगर नहीं हो सकता आपको शक्ति के साथ कुछ और करना होगा मगर आप एक सामान्य बात कर रहे हैं |

अंदर बाहर तो पहले तय कीजिए कि अंदर बाहर क्या है अभी सब कुछ बाहर है दुनिया बाहर है शरीर भी बाहरी सामान है मन की सारी चीजें भी बाहरी है तो अंदर क्या है जिसकी अब बात कर रही फिर आप तुरंत आत्मा परमात्मा यह कहेंगे अब आप विश्वास की बात कर रहे हैं आप नहीं जानते आप जानते हैं आपके पास एक शरीर है। आप जानते हैं आपके पास एक शरीर हैं आप विश्वास करते हैं आपके पास एक मन है मगर कुछ हद तक आप जानते हैं कि बाकी विश्वास है हां या ना मैं यह सवाल नहीं कर रहा कि यह सच है या झूठ चलिए बाहर नहीं जाते मगर यह विश्वास है यह अब तक आपके अनुभव में नहीं है अगर आप किसी चीज के बारे में बोलते हैं जो अब तक आपके अनुभव में नहीं है साफ-साफ कहें तो आप बस एक झूठे हैं इसका यही मतलब है मगर क्योंकि झूठ पवित्र है धर्म ग्रंथों में लिखा है तमाम लोग झूठ बोलते रहते हैं जो तरह तरह के कपड़े पहनते हैं जो मूर्ख होते हुए भी पवित्र माने जाते हैं।

अगर आप अपने मौजूदा बोध से चलेंगे तो आप गलत निष्कर्षों पर पहुंचेंगे तो निष्कर्ष निकालने की हड़बड़ी में ना रहे हैं थोड़ा अधिक ध्यान दें आप एक सार्थक जीवन हैं इसलिए आपको थोड़ा अधिक ध्यान चाहिए दूसरे लोगों का ध्यान मत खींचिए आपका अपना ध्यान दिया इस जीवन को ध्यान की जरूरत नहीं है इस पर ध्यान दीजिए। काफी ध्यान सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा आपके बारे में सब कुछ आप मुझसे पूछ रहे हैं अगर मैं आपको बताऊं आपके पास क्या होगा आपके पास कुछ और शब्दों के कुछ और शब्द आपके पास होंगे वह आपको सच के करीब नहीं ले जाएंगे एक और एक शब्द आपको वास्तविकता के करीब नहीं ले जाएंगे बस आपके पास किसी और को कहने के लिए ज्यादा शब्दों में इस तरह की अफवाह दुनिया में फैल रही हर कोई जानता है ईश्वर कहां है उनकी पत्नी कौन है |

उनके कितने बच्चे हैं उनका जन्म दिन कब है उनका पता हरभजन में लोग उनका पता बता रहे हैं वह कहां हैं और उसे कैसे पाए मगर मगर वह अपने बारे में एक भी चीज नहीं जानते इस तरह की क्या कहें बहुत ज्ञान पूर्ण अज्ञानता खतरनाक है आप जानते हैं अगर आप नहीं जानते हैं यह कोई समस्या नहीं अगर मैं देखता हूं मैं नहीं जानता तो जानने की संभावना हमेशा होती है ना अगर मैं नहीं जानता और सोचता हूं कि मैं जानता हूं तो मैंने सारी संभावनाएं नष्ट कर दी तो हमने बहुत से नतीजे निकाले हम जानते हैं हर संस्कृति में वह जानते हैं कि ईश्वर की प्रकृति क्या है वह कहां रहते हैं वहां का काम और माहौल कैसा है और जानते हर को ईश्वर का नक्शा जानता है हम नहीं जानते मगर आप अपने बारे में एक भी चीज नहीं जानते अब समय है कि हम ध्यान दें क्योंकि आप जो भी जानते हैं |

आप उसे उसी तरह जानते हैं जिस तरह को आपके मन के आसमान में दिखता है आप कोई चीज किसी और तरह से नहीं जानते। तो आपको यह ठीक करना है आप हर चीज को अपने मन के आईने में देख रहे हैं और आईना हिला हुआ है पहले उसे ठीक है पहली चीज है उसे स्थिर समतल एक सीधा दर्पण बनाना ताकि आप हर चीज को वैसे देखें जैसी को है क्या क्षमता लाइन आपको हर चीज पैसे दिखाता है जैसे वह सब कुछ उल्टा आप जानते हैं फिर आपको उसे पलट ना होगा उसमें काफी कुशलता की जरूरत होगी। अब पूरी दुनिया पूरा जीवन जो आपके मन में चल रहा है उसको पलटने न उसे टुकड़े-टुकड़े किए बिना पलटने के लिए और कुछ चाहिए।

मगर पहली चीज है आईने को सीधा करना ताकि वह आपको हर चीज पैसे दिखाएं जैसी वह है किसी और तरह से नहीं आप ही सब कुछ इस तरह दिखता है कि अभी किसी चीज से कैसे जुड़े हर पहचानने आपके मन के आईने को बिगाड़ दिया है। और वह आपको चीजें बिल्कुल अलग तरह से दिखाता है सबसे पहले उन चीजों के बारे में बात करना बंद कर दें जिन्हें आप नहीं जानते कोई सोल कोई आत्मा परमात्मा नहीं ईश्वर नहीं दिव्या नहीं स्वर्ग नहीं ऐसी चीज की बात कीजिए जिसे आप जानते हैं और फिर अगला कदम उठाने की इच्छा तीव्र होगी वरना जब आप स्वर्ग का पूरा नक्शा जानते हैं तो किसी चीज पर ध्यान देने की जरूरत क्या है।


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