अपनी इच्छाओं को कैसे पूरा करें?

अपनी इच्छाओं को कैसे पूरा करें?

जब हम इंसान के रूप में पैदा होते हैं तभी जीवन जटिल हो जाता है अगर हम धरती के किसी दूसरे जीव की तरह यहां आए होते पेट भरा है तो जीवन सेट है जब हम इंसान के रूप में आते हैं तो पेट खाली होने पर सिर्फ एक समस्या है। पेट भर जाए तो 100 समस्याएं होती हैं क्योंकि जिसे हम इंसान कहते हैं उसकी शुरुआत वाकई तब होती है जब जीवन चलाने का प्रबंध हो जाता है जब जीवन यापन होने लगता है सिर्फ तभी मनुष्य होने की खुबिया व्यक्त होती जब तक हम जीवन चलाने के लिए मेहनत करते हैं हम भी किसी अन्य जीव की तरह बस एक जैविक इकाई है। हर चीज एक बड़ा झमेला है यह ऐसा इसलिए है कि इंसानी जीवन बस जीवन की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने से तृप्त नहीं होता अगर हम बस अच्छा खा लेते और सब ठीक हो जाता तो दुनिया को खाना खिलाना बहुत सरल होता लेकिन यह सचनहीं क्योंकि हर दूसरे जीव के लिए प्रकृति ने दो रेखाएं खींची हैं जिनके अंदर ही वह जीते हैं और मरते हैं इंसान के लिए सिर्फ नीचे की रेखा है ऊपर कोई रेखा नहीं है वह किसी भी चीज की आकांक्षा कर सकता है ऊपरी रेखा ना होने की वजह से लोग संघर्ष कर रहे हैं या दूसरे शब्दों में हम जिस चीज से संघर्ष कर रहे वह हमारे बंधन नहीं है। जैसे आमतौर पर लोग कहते हैं हम वास्तव में अपनी आजादी से संघर्ष कर रहे हैं हम खुद को कैसा भी रूप दे सकते हैं यही हमारा संघर्ष है।

अगर हमारा जीवन हर दूसरे जीव के जीवन की तरह होता। क्योंकि हमारे जीवन सीमित नहीं है कोई ऊपरी रेखा नहीं है इसलिए हम किसी भी चीज की आकांक्षा कर सकते हैं यही हमारा संघर्ष है यह विकास से जुड़ी समस्या है यानी हम जिस चीज से संघर्ष कर रहे हैं वह हमारी बुद्धि और जागरूकता है शायद कुछ वैज्ञानिकों ने यह सुझाव दिया है तथाकथित गंभीर वैज्ञानिकों ने यह सुझाव दिया है और यह चौंकाने वाली और डरावनी बात है कि उन्होंने बाकी यह कहा है वह बोले बच्चे के जन्म पर अगर दिमाग की एक छोटी सी सर्जरी कर दी जाए तो हम दुनिया से ज्यादातर अपराध मिटा सकते हैं सभी शांति में होंगे वाकई अगर आप आधा दिमाग निकालने तो कोई भी दुखी नहीं होगा आप उन्हें भोजन दे सकते और शांति से बैठेंगे आपको किसी योग्य ध्यान की जरूरत नहीं होगी अगर आप आधा दिमाग में अगर आप संभावनाएं मिटा दें तो समस्या भी चली जाएंगे यह सभी जानते हैं |

अगर आप सभी संभावनाएं खुली रखें और फिर भी आप समस्या ना हो तो यह होने का एक खूबसूरत तरीका है ना संभावना है ना समस्या यह जीवन मृत्यु है तो इंसान की इस हालत का समाधान क्या है क्योंकि चाहे जो भी हो जाए तृप्ति नहीं मिलती फिलहाल शहर में रहते हुए आपकी जो भी आकांक्षाएं हैं जैसे ही वह पूरी हो जाते हैं आप अगली आकांक्षा आती है कि नहीं इससे फर्क नहीं पड़ता कि आप जीवन में कहां है चाहे आप शहर के राजा हो या बिल्कुल निचले स्तर पर हो आप चाहते हैं कि आपके जीवन में कुछ हो जाता है तो आप चाहते हैं कि अगली चीज हो वह हो जाता है तो फिर अगले हफ्ते में आगे बढ़ रहे हैं मान लीजिए मैं आपको धरती का राजा रानी बना देता हैं। क्या आप तृप्त हो जाएंगे क्या तृप्त होंगे नहीं आप दूसरे ग्रह और सितारे और आकाशगंगा ए पाना चाहेंगे क्योंकि इंसान में कुछ ऐसा है जो किसी भी सीमा में बंद कर जीने के लिए तैयार नहीं है |

वह असीम संभावना की इच्छा रखता है अगर आप असीम को खोज रहे हैं तो उसे भौतिक साधनों के द्वारा खोजना निराश करने वाला काम है आपकी आकांक्षा जबरदस्त है क्योंकि अगर आप वाकई इसे देखें यहां बैठे हुए अगर आप वाकई से देखें मान लीजिए कि आप इसी समय धरती के राजा बन जाते हैं और आपको तृप्ति नहीं मिली तो हमने आपको सौरमंडल का राजा बना दिया तृप्ति नहीं ली हमने आपको ब्रह्मांड का राजा बना दिया तो आप जिस की इच्छा रखते हैं अनंत है। आपकी आकांक्षा बहुत अच्छी है लेकिन तरीका तकलीफ देने वाला है यानी मान लीजिए आज आप अपनी कार चला रहे थे और आपने चांद देखा और आपने वहां जाने की इच्छा हुई कभी-कभी विज्ञापन इतना बढ़ चढ़कर बात करते हैं कि वह बोले अगर आप वाकई एक्सीलरेटर पूरा दबा दें तो आप चांद तक जा सकते हैं अगर आप बहुत जबरदस्त कोशिश करें तो आप चांद से परे जा सकते लेकिन चांद पर नहीं पहुंच सकते। क्योंकि कार चांद पर जाने के लिए उचित वाहन नहीं है आपको चांद पर जाने के लिए दूसरी तरह के वाहन की जरूरत है |

इसी तरह से यहां हम भौतिक तरीकों से अनंत बनने की कोशिश कर रहे हैं आकांक्षा बहुत अच्छी है लेकिन वाहन तकलीफ देने वाला है क्योंकि भौतिक की प्रकृति ऐसी है। भौतिक का मतलब है सीमाओं का तय होना सीमाएं तय होने की वजह से ही हम इसे भौतिक शरीर कह सकते हैं अगर मैं इस की सभी सीमाएं हटा दो यह हर जगह हो तो क्या आप इसे भौतिक शरीर कह सकते हैं भौतिकता मतलब भौतिकता की बुनियादी प्रकृति है एक तय सीमा एक सीमा के बिना भौतिक प्रकृति नहीं हो सकती लेकिन फिलहाल आपके भीतर कुछ ऐसा है जो लगातार सीमाएं तोड़ने की इच्छा रखता है। मैं यह कह रहा हूं कि इससे फर्क नहीं पड़ता कि सीमा कितनी बड़ी है जैसे ही आपको एहसास होता है कि सीमा है तो आप उसे तोड़ना चाहते हां या ना इंसान की यही प्रकृति है इससे भी फर्क नहीं पड़ता हर तरह के आशावादी से ध्यान से खाए गए जितना है उसी से खुश रहो ज्यादा की इच्छा मत करो हर तरह की बातें एक भी इंसान के काम नहीं आई यह तभी काम करती हैं जब आप बीमार होते हैं या मरने वाले होते हैं।

एक स्वास्थ्य जीवंत इंसान के लिए ऐसे सिद्धांत काम नहीं करते कि जितना है उसी में खुश रहो तो क्या इसका मतलब यह है कि इंसान हमेशा के लिए दुखी रहेगा और संघर्ष करता रहेगा। नहीं, हमारी इच्छाओं का स्वभाव बस ऐसा है मुंल बात यही है कि कोई भी चीज हमें तृप्त नहीं कर सकती जब तक हम असीम स्थिति को स्पर्श करें।


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