मन को भटकने से कैसे रोके?

मन को भटकने से कैसे रोके?

आपका मन कहीं नहीं जाता है यही है पर किसी चीज के बारे में सोच रहा है क्या एक ही जाता है आपका मन कहीं नहीं जाता कि यही है और किसी दूसरी चीज के बारे में सोच रहे हैं पर फिर भी यही है ना ना तो आपका शरीर कहीं जाता है नहीं आपका मन कहीं जाता है और ना ही आप कहीं जाते वह हमेशा मिलकर एक संपूर्ण इकाई बनाते हैं अगर आप कोई चीज करना चाहते हैं तो आपको कुछ ऐसा करना होगा जो उन सभी के लिए काम करें आप ही ने अलग अलग नहीं संभाल सकते इसे अलग से उसे अलग से हमेशा एक साथ होते हैं बस इतनी है कि आप अपने मन की कल्पना से धोखा खा रहे हैं। यही है और  कुछ कल्पना कर रहा है यह कहीं नहीं जा रहा है लेकिन आपकी पहचान इतनी गहरी है और आप इतने खोए हुए हैं कि आप सोचते हैं कि मन कहीं जा रहे हैं।

मन कहीं सफर नहीं करता यह बिल्कुल यहीं पर आपको यह समझने की जरूरत है आपके मन में बेकाबू और अंतिम विचार इसलिए चल रहे हैं क्योंकि आपने उन चीजों के रूप में अपनी पहचान बना रखी है जो आप नहीं है जिस पल आपको की पहचान किसी ऐसी चीज के रूप बना लेते हैं जवाब नहीं है तब मन बिना रुके चलने लगता है आपने अपनी पहचान कई चीजों से जुड़ी हुई है और आप अपने मन को रोकने की कोशिश कर रहे हैं मैं आपको बता रहा हूं अगर आप लाखों साल तक कोशिश कर ले तू भी ऐसा नहीं होने वाला यह नहीं हो सकता अगर आप अपनी गलत पहचानो को मिटा देते हैं तब आप इसी पल देखेंगे कि आपका मन दर्पण की तरह होगा यह कुछ नहीं कहेगा बस हर चीज को परावर्तित करेगा मन ऐसे ही होना चाहिए आपका मन है तभी सबसे अच्छा काम करता है।

आपका मन में हर तरह के कारण चीजों के बारे में सोचने के लिए नहीं है वह जीवन में भटकाव है आपका मन आपको जीवन में स्पष्टता और गहराई देने के लिए लेकिन अभी आपका मन बस उनका एक भारी पुलिंदा है सिर्फ इसलिए क्योंकि आपने कई ऐसी चीजों के रूप में अपनी पहचान बनानी है जवाब नहीं है और अब आप इसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं इसे रोक कर रखने का कोई तरीका नहीं है आपने बहुत बुरा खाना खाया और अब आपके पेट में गैस बन गई आप से रोक नहीं सकते।आपने गलती की कि कई चीजों के साथ अपनी पहचान जोड़ ले अब यह लगातार चलता जा रहा है आप इसे रोक नहीं सकते इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्या क्या करते हैं आप भगवान के बारे में सोचिए भगवान खुद आपको कई जगहों पर ले जाएंगे अब आप यहां बैठे हैं और ध्यान करने की कोशिश कर रहे हैं।

अभी सबसे से पहले आप की सबसे बुनियादी पहचान आपका शरीर है आपने पहचान बना रखी है अपनी शरीर अपने कपड़े अपने हेयर स्टाइल और अपनी दाढी के रूप में भी पहचाने आपकी पत्नी आपके बच्चे आपका परिवार आपकी शिक्षा का धर्म अनगिनत आधारों पर पहचाने इन सभी पहचानो के साथ आप एक शांत मन चाहते हैं ऐसी कोई चीज नहीं होती तो आप सारी पहचान उसे भी अलग हो जाते हैं क्योंकि मन ही पहचान पैदा करता है इसलिए हर तरह की चीजें मत सोचिए।


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