योग का जन्म कैसे हुआ?

योग का जन्म कैसे हुआ?

15000 साल पहले हिमालय की ऊंची चोटियों में एक योगी प्रकट हुए कोई नहीं जानता था कि वह कहां से आए हैं उनके अतीत की कोई जानकारी नहीं थी तो लोग उनके आसपास इकट्ठे हो गए क्योंकि उनकी उपस्थिति इतनी जबरदस्त थी लोगों का एक बड़ा समूह में खट्टा हो गया उन्हें उम्मीद थी कि वे कुछ बोलेंगे कुछ करेंगे उन्होंने ना तो कुछ किया ना ही कुछ बोले बस बैठे रहे। उन्होंने ना तो कुछ किया नहीं कुछ बोले बस बैठे रहे 1 दिन या 1 हफ्ते नहीं वह महीनों तक बस फिर बैठे रहे सभी चमत्कार की उम्मीद कर रहे थे कुछ नहीं हुआ दो बस बैठे रहे लेकिन वे बहुत बुनियादी चमत्कार नहीं समझ पाए क्योंकि सुधार आपके शरीर की प्रकृति ऐसी है कि आपका अच्छा ध्यान रखा जा रहा है आपने दोपहर में भोजन किया शाम में शायद नाश्ता किया और नींद ना आने के लिए कॉफी पी पी और शायद आप के बैग में भी कुछ है कितनी चीजें हैं इन सभी चीजों का ध्यान रखा जा रहा है इसीलिए ठीक है मान लीजिए हम आपको यहां 4 घंटे बिठा दे।

जिसे आप शरीर कहते हैं वह बस प्रक्रियाओं की श्रृंखला है जब आप उनका ध्यान रखते हैं सिर्फ तबीयत ठीक रहता है अगर आप ध्यान रखें तो आप देखेंगे यह क्या मुसीबत है जब आप शरीर का ध्यान नहीं रखते अगर आप भूखे हैं वह छोड़िए लोग कहते हैं कि 1 मिनट कितना लंबा है यह उस पर निर्भर करता है कि आप बाथरूम के दरवाजे के किस तरफ है अंदर से कोई कहता है बस 1 मिनट बाहर हुए युग की तरह लगता है ठीक है क्योंकि शरीर की प्रकृति है अगर आप इसका ध्यान रखें तो यह बहुत बड़ी मजबूरी बन जाएगी और बहुत परेशान करेगी।

पर भी बस बैठे रहे उन्होंने ना तो कुछ खाया ना पिया ना ही सोच के बस फिर बैठे रहे लोगों को यह भी समझ नहीं आ रहा था कि वे जिंदा है या मर गए उनके जीवित होने का एक ही लक्षण था कि रुक रुक कर उनके गालों पर परमानंद के आंसू बह रहे थे वरना वे बिना हिले दुले बैठे रहे तो बस 7 लोग रुके रहे उन्हें उनके इस तरह बैठने का चमत्कार समझ आया क्योंकि अगर गए इस तरह बैठे हैं तो इसका मतलब यह है कि वह भौतिकता से परे हैं वरना वैसे बैठी नहीं सकते यह 7 लोग रुके रहे और आज हम उन सातों को सप्तर्षियों के नाम से जानते हैं |

 यह आदियोगी के पहले शिष्य थे तो यह आदियोगी बस बैठे रहे और जब इंसानों ने रुचि दिखाई तब उन्होंने कहा यह आपके लिए नहीं है यह कोई मनोरंजन नहीं है वे बोले नहीं हम कुछ भी करने को तैयार हैं उन्होंने उन लोगों को कुछ शुरुआती तैयारी कराई कई सालों तक तैयारी करते रहे फिर एक दिन जब सूरज की गति बदल रही थी अभी-अभी हमने ग्रीष्म संक्रांति संक्रांति में प्रवेश किया है 22 दिसंबर को 21 जून को होगा और यह 21 जून दुनिया के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन आदि योगी ने दक्षिण की ओर मुड़कर शिक्षा देनी शुरू की थी क्योंकि सूरज दक्षिण की ओर मुड़ गया तो वे भी दक्षिण की ओर मुड़ गए और इंसान होने का यंत्र विज्ञान समझाने लगे इसी दिन को सौभाग्य से संयुक्त राष्ट्र ने विश्व योग दिवस घोषित किया है क्योंकि इसी दिन योग की शुरुआत हुई थी इंसानी यंत्र विज्ञान को समझने की यह अद्भुत प्रक्रिया शुरू हो गई यह सभी धर्मों से पहले की बात है जब धरती पर कोई धर्म नहीं था। 15000 साल पहले उन्होंने इंसान होने का यंत्र विज्ञान समझाया और कई पहलू सामने आए उन्होंने 112 तरीके सिखाए जिन से इंसान अपनी परम प्रकृति को पा सकता है और जब लोगों ने पूछा विशेष रूप से उनकी पत्नी पार्वती ने पूछा किशोर 112 क्यों और क्यों नहीं वह बोले अगर आप शरीर में हैं तो सिर्फ 112 तरीके हैं अगर आप शरीर से परे हैं तो इस सृष्टि में जितने परमाणु हैं उतने मार्ग है अगर आप खोज करना चाहते हैं तो लेकिन अगर आप शरीर में हैं तो सिर्फ 112 तरीके हैं।

और पूरा योग विज्ञान आज भी यही मानता है क्योंकि कोई भी नए तरीके नहीं ढूंढ पाया है कितने ही योगियों ने लाखों अलग-अलग तरीकों से खोज की है लेकिन और कोई मार्ग नहीं है इस शरीर में 112 तरीके की है जिनसे आप वहां पहुंच सकते हैं तो इसे कैसे तैयार करें इससे अपनी इच्छा के अनुसार कैसे काम करवाएं तो यह पूरा तंत्र विज्ञान आदि योगी ने कई सालों तक सिखाया और उन्होंने के व्यापक ज्ञान दुनिया को दिया और फिर इन सात लोगों को सात अलग-अलग दिशाओं में जाने को कहा एक मध्य एशिया गए एक उत्तरी अफ्रीका गए एक दक्षिण अमेरिका के एक दक्षिण पूर्वी एशिया के एक हिमालय पर्वत के भारतीय हिस्से में आए एक उनके साथ रुक गए और एक अन्य और एक अन्य जो हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है अगस्त्यमुनि वे दक्षिण की ओर उन्हें दक्षिण दर्शन का जनक माना जाता है क्योंकि उन्होंने विंध्या पर्वत के दक्षिण में एक भी इंसानी आबादी को नहीं छोड़ा। दक्कन पठार में उन्होंने सुनिश्चित किया कि हर वह इंसान जो यहां रहता है वह आध्यात्मिक प्रक्रिया के बारे में कुछ ना कुछ जाने।


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