अपनी बीमारी खुद कैसे ठीक करें?

 अपनी बीमारी खुद कैसे ठीक करें?

स्वास्थ्य बहुत मजेदार चीज है जिस तरह आज दुनिया में उसे समझा जाता है हेल्थ प्रोफेशन बहुत कम है सिर्फ मेडिकल प्रोफेशन मौजूद है लोग मेडिसिन सीखते हैं स्वास्थ्य नहीं करीब 15000 साल पहले जब आदियोगी हिमालय के ऊपरी इलाकों में प्रकट हुए जब लोगों ने उनसे जीवन का मार्ग जानने की कोशिश की तो उन्होंने जो पहली चीज दिखाएं और सबसे मूलभूत चीज दिखाएं उसे आज भूत शुद्धि कहा जाता है यानी शरीर के भीतर पांच तत्वों की सफाई भूत शुद्धि अगर सही तरीके से की जाए तो उससे भूत शुद्धि से दे या पंच तत्वों पर महारत हासिल हो सकती हैं।

यह इस समस्झ का है यह आधार से आता है कि अगर आप एक साफ-सुथरी इमारत बनाना चाहते हैं। तो आपको बस निर्माण सामग्री का ठीक से ध्यान रखना होगा अगर निर्माण सामग्री शुद्ध नहीं है उसकी गुणवत्ता अच्छी नहीं है तो जो इमारत आप बनाएंगे जो ढांचा बनाएंगे वह घटिया क्वालिटी का होगा खुशाली की तकनीकें क्योंकि हमने कभी शरीर को अपना पूरा जीवन नहीं माना हमने हमेशा शरीर को ऐसी चीज के रूप में देखा जिसे किसी क्षण हम छोड़ देंगे खुशहाली की हमारी भावना जीवन की भौतिकता तक सीमित नहीं थी इसलिए फोकस हमेशा आंतरिक खुशाली पर था जो कुदरती रूप से एक इंसान की भौतिक खुशहाली को प्रेरित करेगा इसलिए मैं लोगों से पूछता रहता हूं अगर आपको अपने शरीर से कोई परेशानी है तो सबसे पहले यह समझे कि शरीर कहां से बना है अगर आप केला खाते हैं यह केला अंदर जाकर एक इंसान बन जाता है।

तो इसमें एक किस्म की समझदारी और गुण और क्षमता है जो केले से इंसान बनाने में सक्षम है तो इस शरीर का सृजन अंदर से ही होता है जब यह शरीर अंदर से बना है जब यह शरीर अंदर से बनाएं जब हम जानते हैं कि शरीर के सर्जन का स्त्रोत ही हमारे अंदर है अगर आपको मरम्मत करनी होगी तो आप निर्माता के पास जाना चाहेंगे या लोकल मैकेनिक के पास अधिकांश लोग लोकल मकैनिक के पास जाने का चुनाव करते हैं वह इसलिए नहीं की वह यही करना चाहते हैं वह इसलिए क्योंकि वह निर्माता तक पहुंचने का रास्ता भूल गए वह बुनियादी ढांचा जो शारीरिक और मानवीय दोनों अर्थों में आंतरिक खुशहाली की स्थिति को लोगों तक पहुंचाने के लिए जरूरी है दुर्भाग्य से देश में पिछले 200 से 300 सालों के विदेशी राज में नष्ट हो गए जहां भी मानव आबादी रहती थी ऐसी जगह थी जहां औषधि उठती थी और लोगों को बस वहां तक पहुंचना होता था उन्हें किसी दुकान में जाकर उसे खरीदना नहीं होता था |

उन्हें किसी के इलाज के लिए जरूरत नहीं थी क्योंकि लगभग हर कोई जानता था कि खुद के साथ क्या करना है आपकी दादी अपनी सेहत और खुशहाली के बारे में जो जानती थी और आज भी मौजूद है उन्हें हर छोटी चीज के लिए गोली या इंजेक्शन या कुछ और की जरूरत पड़ती है  1 दिन में साल में ही कैसे यह सब बदल गया है। कि कोई शारीरिक चीज कोई बीमारी नहीं टूटी हुई हड्डी जैसी शारीरिक चीज सवा घंटे में पूरी तरह ठीक हो गई और मैं एकदम ठीक हो गया और इसी अनुभव से लैस होकर मैंने कई रूपों में अपने साथ प्रयोग करना शुरू कर दिया और कई नतीजों पर पहुंचा और आज उसे ही हम इन्हें इंजीनियरिंग प्रक्रिया के रूप में सिखा रहे हैं।


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